बीजेपी लीडर्स एंड जिन्नाह १९४७ में जिन्नाह का स्वर्गवास हो गया और उनको करांची में दफना दिया गया। वे इतने साल शान्ति से सो रहे थे । पाँच साल पहले, एक भजप्पा नेता हाथ में
कमल का फूल हाथ में लिए जिन्नाह साहब की कबर पर अपना आदर भेंट करने गए । जिन्नाह साहब आत्मा को वह आदमी और कमल की खुशबू दोनों बहुत ही पसंद आई और उनके भूत काल की आत्मा , वर्तमान काल में आ गई और भारतीय भाज्जप्पा लीडर के सर पर भूत बन कर सवार हो गई और उनकी जुबान एंट कर, ऐसे बयांन बाजी कर वाई की नेताजी पॉँच साल से सफाई देते फ़िर रहे हं की .... जिन्नाह साहब के भूत को भारती नेताओं का वर्तमान बहुत ही पसंद आया , और कमल की खुशबू इतनी प्यारी लगी की फ़िर से दूसरा भजप्पा नेता ढूंड और फिर उसके सर पर जिन्नाह का भूत चढ़ गया और जिन्नाह के भूत ने और इसका हाथ मरोड़ कर एक किताब ही लिखवा डाली । भूत या जिन्ह तो इस तरह भारती जनता नेता पर सवार हुआ की, नेता तो ख़ुद को हि फ़ना कर बैठा । अपना भूतकाल वर्तमानकाल भूल के जिन्नाह के भूत के साथ लग गया .वह रे जिन , वहा रे जिन्नाह । तू भविष्य न निगल , तू और के सर पर न बैठ , कमल का शौक छोड़ दे, किसी और का भविष्य न ख़राब कर, किसी और भाजप्ई का भविष्य न बिगाड़ । गलती तो हमारे नेताओ की हें की भारत के सपूतो के सर पर पाँव रख कर, विभाजन की दीवार के उस पार, देखते हें , चढ़ कर अपना भविष्य दांव पर लगाते हें । भारतियों के भविष्य की चिंता चिंतन छोड़, उधर के गडे मुर्दे उखाडा करते हें ।लेखक : शिवराज गोयल , ५५९/१,सवामी विवेकानंद सड़क , मलाड पश्चिम, मुंबई ४००४६४ भविष्य
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